कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चौदस को नरक चतुर्दशी मनायी जाती है जिसे रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है ∣ इसे छोटी दिवाली के नाम से हम सब जानते है ∣ जो दिवाली के एक दिन पहले मनायी जाती है ∣
पर क्या आप जानते हैं कि नरक चतुर्दशी को मनाने के पीछे का क्या कारण है?
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक , जब धरती पर नरकासुर नाम के राक्षस से पूरी धरती त्राहिमाम -त्राहिमाम करने लगी ∣ इसके कारण देवताओं से लेकर साधु संत भी नरकासुर राक्षस के आतंक से काफी ज्यादा परेशान हो गए ∣ किन्तु नरकासुर का कोई देव चाहकर भी कुछ नहीं कर पाया जिसका कारण नरकासुर को भगवान ब्रह्म देव का वो वरदान था " जिसमें उसका वध कोई भी पुरूष नहीं कर सकता था ∣ तब भगवान कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की मदद से नरकासुर का वध कर उसके बंधक से 16000 दासियों को मुक्त कराया था जो बाद में भगवान कृष्ण की पटरानियां बन गयी थी ∣ तब उन 16000 दासियों ने भगवान कृष्ण के लिए दीयों को जलाया था साथ ही भगवान यम को प्रसन्न करने के लिए दीपदान किया था ∣उस दिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चौदस थी जिसे भी हर साल नरकासुर चौदस के रूप में मनाया जाने लगा ∣


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