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जानें क्यों मनायी जाती है नरक चतुर्दशी

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चौदस को नरक चतुर्दशी मनायी जाती है जिसे रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है ∣ इसे छोटी दिवाली के नाम से हम सब जानते है ∣ जो दिवाली के एक दिन पहले मनायी जाती है ∣ 

पर क्या आप जानते हैं कि नरक चतुर्दशी को मनाने के पीछे का क्या कारण है? 

आइए जानते हैं आखिर क्यों मनायी जाती है नरक चतुर्दशी


पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक , जब धरती पर नरकासुर नाम के राक्षस से पूरी धरती त्राहिमाम -त्राहिमाम करने लगी ∣ इसके कारण देवताओं से लेकर साधु संत भी नरकासुर राक्षस के आतंक से काफी ज्यादा परेशान हो गए ∣ किन्तु  नरकासुर का कोई देव चाहकर भी कुछ नहीं कर पाया  जिसका कारण नरकासुर को भगवान ब्रह्म देव का वो वरदान था " जिसमें उसका वध कोई भी पुरूष नहीं कर सकता था ∣ तब भगवान कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की मदद से नरकासुर का वध कर उसके बंधक से 16000 दासियों को मुक्त कराया था जो बाद में भगवान कृष्ण की पटरानियां बन गयी थी ∣ तब उन 16000 दासियों ने भगवान कृष्ण के लिए दीयों को जलाया था साथ ही भगवान यम को प्रसन्न करने के लिए दीपदान किया था ∣उस दिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चौदस थी जिसे भी हर साल नरकासुर चौदस के रूप में मनाया जाने लगा ∣

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

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पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..