दीपक की आत्मकथा


 बहुत ही कम कीमत में मिल जाने वाले इस दीप की  असली कीमत इतनी ज्यादा होती है जिसे चाहकर भी हम अदा नहीं कर  पाते हैं ∣  कहने को तो ये एक मात्र मिट्टी का दीपक होता है  जिसका उपयोग करने के बाद ये अक्सर हमारी आंखों से ओझल सा हो जाता है ∣ किन्तु
 
ये आम सा दिखने वाले दीपक का जन्म ढेरों तूफान के बीच में होता है ∣ जिसके  बनने की प्रक्रिया काफी कष्ट दायक होती है ∣ तब जा के दीपक आकार ग्रहण कर पाता है ∣
पहले इसे कुम्हार पैरों से बहुत पीटता है ∣ फिर इसे बाहर से चोट पहुंचता है अंदर से इसे सहारा देता है ∣  इसके बाद इसे पकाया जाता है तब जाके ये एक आकर ले पाता है ∣ 
इस दीपक की तरह मनुष्य का जीवन होता है जहां पर अक्सर जीवन की विकट परिस्थितियों के समक्ष हमें काफी कष्ट सहना होता है ∣ ढेरों कष्ट का सामना करने के बाद हमारा जन्म होता है ∣



 






Comments

Unknown said…
शुभाकॉमनाऐं । आशा है भविष्य में भी आपके विचारों से अवगत होने का अवसर मिलेगा ।
आपकी शुभकामनाओं के लिए शुक्रिया