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दीपक की आत्मकथा


 बहुत ही कम कीमत में मिल जाने वाले इस दीप की  असली कीमत इतनी ज्यादा होती है जिसे चाहकर भी हम अदा नहीं कर  पाते हैं ∣  कहने को तो ये एक मात्र मिट्टी का दीपक होता है  जिसका उपयोग करने के बाद ये अक्सर हमारी आंखों से ओझल सा हो जाता है ∣ किन्तु
 
ये आम सा दिखने वाले दीपक का जन्म ढेरों तूफान के बीच में होता है ∣ जिसके  बनने की प्रक्रिया काफी कष्ट दायक होती है ∣ तब जा के दीपक आकार ग्रहण कर पाता है ∣
पहले इसे कुम्हार पैरों से बहुत पीटता है ∣ फिर इसे बाहर से चोट पहुंचता है अंदर से इसे सहारा देता है ∣  इसके बाद इसे पकाया जाता है तब जाके ये एक आकर ले पाता है ∣ 
इस दीपक की तरह मनुष्य का जीवन होता है जहां पर अक्सर जीवन की विकट परिस्थितियों के समक्ष हमें काफी कष्ट सहना होता है ∣ ढेरों कष्ट का सामना करने के बाद हमारा जन्म होता है ∣



 






Comments

Unknown said…
शुभाकॉमनाऐं । आशा है भविष्य में भी आपके विचारों से अवगत होने का अवसर मिलेगा ।
आपकी शुभकामनाओं के लिए शुक्रिया

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..