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अपने नाम को चरितार्थ करती गुडबाय मूवी



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गुडबाय मूवी अपने नाम को पूरी तरह से चरितार्थ करती है ज़ो दर्शकों को कहीं पर हंसाती, तो कहीं पर रुलाती है ∣
फिल्म की कहानी की अगर हम बात करें... तो ये मूवी एक फैमिली कॉमेडी ड्रामा हैं 

मूवी के शुरू होते हुए हम देखते हैं कि तारा भाला ( रश्मिका मंदाना) अपने केस जीतने की खुशी में नाईट क्लब में पार्टी कर रही है जिसे भारतीय रीति रिवाजों पर बिल्कुल यकीन नहीं है जो हर चीज में विज्ञान खोजती है∣
वही दूसरी ओर उसके पिता हरीश भाला ( अभिताभ बच्चन) विदेश में रह रहे बच्चों को अपनी पत्नी गायत्री भाला (नीना गुप्ता) के निधन की सूचना दे रहे हैं ∣ 
 सभी बच्चे माँ के निधन की सूचना पाकर भारत आने की तैयारी करते हैं ∣ फिल्म की पूरी कहानी माँ के निधन के बाद उनके लिए किए जाने वाले रीति रिवाज और कर्मकांडों के इर्दगिर्द घूमती हुयी नजर आती है ∣ जहां पर विदेश में रह रहे बच्चे समय के अनुसार बहुत बदल चुके हैं..जो अब पूरी तरह से विदेशी हो गए हैं ∣ फिल्म की कहानी  मजाकिया ढंग में ..आज के समय लोगों में आ रही संवेदनाहीनता पर तंज कसते हुए अपनी बात मजबूती से र्शकों के सामने रखती है
 ∣
 वहीं इसकी सिनेमोटोग्राफी से लेकर डॉयलॉग डिलीवरी काफी अच्छे से की गयी है ∣ जो दर्शकों को बांधने में सफलता पाती है ∣

इसमें में अगर हम एक्टिंग की बात करें...तो अभिताभ बच्चन ने हरीश भाला का किरदार बखूबी से निभाया है ∣ वहीं नीना गुप्ता ने गायत्री भाला का किरदार काफी अच्छे से अदा किया है ∣ इसके अलावा रश्मिका मंदाना ने तारा भाला का किरदार में खुद को बखूबी समहित किया है ∣

वहीं इस मूवी का विश्लेषण कर हम कह सकते हैं कि ये मूवी  हीं कहीं हंसाने में सफल तो कहीं असफल होती दिखाई देती है ∣ ऐसा लगता है कि जैसे इसका लेखक स्वयं ही असमंजस में है कि उसे यहां पर लोगों को हंसाना है यहां रुलाना है ∣
इसके अलावा मूवी में भावुक दृश्य भी कई बार संवाद के चलते इतने बोझिल से लगते हैं जो दर्शकों को पूरी तरह से भावुक भी नहीं कर पाते है ∣ सिवाय उस दृश्य के जब गायत्री की चिता को मुखाग्नि दी जाती है उस वक्त वो दृश्य दर्शकों को एक पल के लिए रुला सा देता है ∣

कुल मिलाकर ये मूवी देखी जाने वाली है जो हमें जीवन के प्रति एक नया नजरिया देती है ∣





 

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