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World Suicide Prevention Day 2022

World Suicide Prevention Day 2022
 The theme of WSPD 2022, “Creating hope through action"
हर साल 10 सितम्बर को आत्महत्या रोकथाम दिवस ( World Suicide Prevention Day) मनाया जाता है
 ∣ इस दिवस को मनाने का उद्देश्य आत्महत्या  करने वाले को  जिंदगी के प्रति सकरात्मक रवैया देना, साथ ही उन्हें आत्महत्या करने से रोकना है ∣

देखा जाएं तो आज भी आत्महत्या (Suicide) हमारे समाज में एक ऐसा विषय है जिस पर हमारा समाज बात नहीं करता है ∣ न ही हमारे आस पास के लोग इसके कारण को जानने के इच्छुक दिखाई देते हैं∣ आत्महत्या (Suicide)का ग्राफ भारत में कोरोना के बाद से लगातार बढ़ा हैं∣ चौकाने वाली बात तो ये है कि आत्महत्या करने वाले लोगों में बड़ी संख्या में युवा शामिल हैं ∣ इसमें सबसे ज्यादा वो युवा है जो शिक्षित हैं किन्तु बेरोजगारी के चलते मानसिक अवसाद का शिकार हैं 
इस परिस्थिति को बदलने के लिए आवश्यक है कि हम  समाज के उस वर्ग पर ध्यान दें, जिसे हम सबसे ज्यादा नजर अंदाज कर ये कह कर देते हैं कि आजकल के युवा करते ही क्या है ? 
पर इसके विपरीत आज के युवा ही जान रहे होते हैं कि वो किस तरह की सामाजिक ,आर्थिक और मानसिक परेशानी झेल रहे होते हैं ∣

सोशलमीडिया क्रांति ने जहां एक ओर लोगों को जोड़ दिया है ∣ वहीं, दूसरी तरफ आज युवा इसके चलते अवसाद से  ग्रसित हो रहे है ∣ आज वो सोशलमीडिया की दुनिया को देख, खुद की क्षमताओं पर संदेह करने लगे हैं उन्हें लगता है कि केवल उनकी ही जिंदगी में सारी परेशानी है ∣ बाकी सब की जिंदगी कितनी अच्छी है ∣ जबकि सच्चाई इसके विपरीत होती है ∣ अक्सर सोशलमीडिया में दिखाई देने वाली चीजें सच नहीं होती वो केवल like, comment, share तक ही सीमित होती है ∣
आज जरूरत है हमें अपनी ताकत पहचानने की, ऐसे दोस्त बनाने की जो सोशलमीडिया में नहीं बल्कि वास्तविक जिंदगी में हमारे दोस्त हो ∣ 




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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..