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इसलिए मनाया जाता है ' international Daughters Day' जानें




 हर साल सितम्बर के चौथे रविवार को 'International Daughters Day'  मनाया जाता है ∣ 
इस दिवस का उद्देश्य लड़कियों के साथ हो रहे लैगिक भेदभाव को रोकना है ∣
आज भी देश में लड़के के जन्म को जहां एक त्यौहार जैसे मनाया जाता है ∣ वहीं लड़कियों के जन्म पर  घर में लक्ष्मी आयी है कहते हुए ,अक्सर समाज में बेटियों को बोझ सा समझ जाता है ∣ कम उम्र में बाल विवाह, न्यूनतम शिक्षा उन्हें दी जाती है ∣ 
जहां पर आज भी सबसे बड़ी विडंबना ये है कि  अच्छे शिक्षित परिवार की सोच लड़कियों के लिए वही रूढ़िवादी होती है ∣ अगर एक लड़की भी पैदा हो जाएं तो उन्हें वो भार लगने लगती है ∣ इस सोच को बदलने की जरूरत है ∣ 

हम सब को उस सोच को खत्म करना होगा ,जहां पर लड़की मतलब केवल बोझ है जिसका जल्दी विवाह कर उससे अपनी जिम्मेदारी  छुड़ाना है ∣ आज हमें ये समझना होगा जिस तरह एक घर में बेटे की जरुरत है उसी तरह एक बेटी की भी जरूरत है ∣ वो बोझ नहीं, हमारे समाज की जरूरत है ∣




 

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..