आज भी देश में लड़के के जन्म को जहां एक त्यौहार जैसे मनाया जाता है ∣ वहीं लड़कियों के जन्म पर घर में लक्ष्मी आयी है कहते हुए ,अक्सर समाज में बेटियों को बोझ सा समझ जाता है ∣ कम उम्र में बाल विवाह, न्यूनतम शिक्षा उन्हें दी जाती है ∣
जहां पर आज भी सबसे बड़ी विडंबना ये है कि अच्छे शिक्षित परिवार की सोच लड़कियों के लिए वही रूढ़िवादी होती है ∣ अगर एक लड़की भी पैदा हो जाएं तो उन्हें वो भार लगने लगती है ∣ इस सोच को बदलने की जरूरत है ∣
हम सब को उस सोच को खत्म करना होगा ,जहां पर लड़की मतलब केवल बोझ है जिसका जल्दी विवाह कर उससे अपनी जिम्मेदारी छुड़ाना है ∣ आज हमें ये समझना होगा जिस तरह एक घर में बेटे की जरुरत है उसी तरह एक बेटी की भी जरूरत है ∣ वो बोझ नहीं, हमारे समाज की जरूरत है ∣

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