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जानें क्यों मनायी जाती है शारदीय नवरात्रि,




हिन्दू धर्म में चार तरह की नवरात्रि मनायी जाती है ∣ इसमें दो नवरात्रि गुप्त जो की तंत्र साधना के लिए होती है ∣ जबकि इसके अलावा चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि मनाई जातीहै ∣ जो कि गृहस्थ लोगों के द्वारा मनायी जाती है ∣ इनकी धूम पूरे दक्षिण से लेकर उतर भारत में दिखाई देती है ∣
शारदीय  नवरात्रि में शक्ति स्वरूपा माँ के घट की  स्थापना की जाती है  ∣ पूरे नौ दिन तक माता रानी की पूजा अर्चना की जाती है ∣ भक्त अपनी इच्छा शक्ति के  अनुसार व्रत भी रखते हैं ∣ 

आज हम जानेंगे शारदीय नवरात्रि मनाने के पीछे की कहानी.... 

पौराणिक मान्यताओं के मान्यतानुसार के अनुसार,  एक समय की बात है जब महिषासुर नाम के एक राक्षस ने भगवान ब्रह्मा जी को प्रसन्न कर ये वरदान मांग लिया कि मेरा वध कोई भी नहीं करेगा, मैं सदा के लिए अमर हो जाउंगा ∣ तब ऐसा वरदान मिलने के बाद धरती से लेकर पाताल तक में महिषासुर के नाम का आतंक फैल गया ∣  तब इंद्र देव सहित बाकी देव सृष्टि के पालक ब्रह्म , विष्णु, महेश से मदद लेने गए ∣ तब उन तीनों देव के शरीर से  जो तेज निकला उससे एक शक्तिरूपा माँ दुर्गा की उत्पत्ति हुई  इसके पश्चात माँ दुर्गा और महिषासुर के मध्य पूरे नौ दिन तक युद्ध चल दसवे दिन माँ दुर्गा ने उस राक्षस का वध कर दिया तब से शारदीय नवरात्रि मानने की परम्परा चली आ रही है ∣ 


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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..