दुनिया की फिक्र में बैठे
खुद की फिक्र करना जैसे भूल
ही गए हैं हम
सबकी लेते हैं खबर
पर अपनी खबर लेना जैसे भूले हैं हम
क ई बार सिर्फ अहा! निकल कर रह जाती है
दर्द को सहते हुए, शिकायतें करना
भूल सा गए है हम
खुद की तारीफे करने की
पर हम में भी नहीं है जुनून कम,
शौक हमारे भी हजार है
पर आईना देखने के ख्याल से दूर
रहने लगे है हम
कुछ कहते नही इसका मतलब नहीं
हम में कोई सवाल नहीं
दूसरों को लेकर,
जानते हैं इस दुनिया के नियम कायदे
किंतु खुद की अच्छाई को दूसरे के लिए
क्यों छोड़े हम
माना की मुश्किल है ∣
पर इसलिए लिए तो दूसरों से अलग है हम ∣

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