आओं जानें हिन्दी को


14 सितम्बर 1949 को भारत की राजभाषा के रूप में हिन्दी को स्वीकार किया गया था ∣ राजभाषा का आशय शासकीय कार्य के लिए हिन्दी का प्रयोग करना से था ∣ यहां बात ध्यान रखने वाली है कि संघ की भाषा हिन्दी होगी लेकिन आधिकारिक रूप से प्रयोग किए 
जाने वाली संख्याओं का रूप अंतराष्ट्रीय रखा गया न कि देवनागरी ∣
वहीं दूसरी ओर देश की उच्चतम न्यायालय में हिन्दी भाषा का उपयोग नहीं किया जाता है ∣  देश की किसी भी न्यायालय जो भी निर्णय लिए जाते हैं वो लिखित रूप में अंग्रेजी भाषा में ही होती है ∣ उसकी कार्यवाही भी अंग्रेजी में ही होती है ∣ 
इसके अलावा हिन्दी को सबकी जनभाषा बनाने के उद्देश्य से भारतीय संविधान के भाग 17 में राजभाषा को शामिल किया गया है ∣  इसमें अनुच्छेद 343 से 351 तक हिन्दी के लिए अनुच्छेद थे ∣

इस भाग में क्षेत्रीय भाषाओं के अंतर्गत  राज्यों को ये रियायत दी गयी है कि वो हिन्दी के अलावा अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को भी अपनी राजभाषा बना सकते हैं ∣
इसके चलते दक्षिण भारतीय राज्यों जिनमें केरल,आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु ने अपनी राजभाषा अपनी क्षेत्रीय भाषाओं को बनाया है न की हिन्दी को ∣ वहीं उत्तर भारत के राज्यों जिनमें गुजरात , उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार, हरियाणा , छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, गुजरात जैसे राज्यों ने हिन्दी को अपनी राजभाषा माना है ∣ जबकि उत्तर- पूर्वी राज्यों में मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा ने अपनी राजभाषा अंग्रेजी को माना है ∣ गौरतलब है कि राज्यों के द्वारा भाषा का चयन संविधान की केवल आठवीं अनुसूची में उल्लिखित भाषाओं तक सीमित नहीं है ∣

वहीं संविधान लागू होने के 15 वर्ष तक के लिए अंग्रेजी को भारत की राजभाषा होनी थी किन्तु उसने अपना अस्तित्व राजभाषा के तौर पर आज भी बनाएं रखा है ∣





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