कभी कभी हमारा मन किसी भी काम को नहीं करने का होता है हमें लगता है कि हम इस काम को करें या न करें इसमें कोई स्वाद नहीं इसलिए इसे छोड़कर कुछ और करें ∣
ऐसे में हम बीच आधार में खुद को लटका पाते हैं ∣ जहां पर एक तरफ कुंआ दूसरी तरफ खाई होता है ∣ हमें कुछ समझ नहीं आता है कि हम किस काम को करें या न करें ∣
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