शून्य से शिखर तक


इस दुनिया (world) में ऐसा कोई इंसान नहीं जिसने अपना नाम बनाने के लिए सीधे ऊंचाई पर पहुंचकर ही मेहनत की हो, सब ने शून्य (Zero) से ही शुरुआत की हैं तब जाके उसने सफलता (Success) के शिखर  को पाया ∣


शून्य से शिखर तक की इस बेला में 

शून्य जो सभी तरह के गुणों से रहित है जिसकी सीमा अनंत है ∣ इसी खोज का श्रेय  भारत को जाता है ∣ जिसने दुनिया को सभ्यता से परिचय कराया ∣ शिखर तक पहुंचने की बेला में कई बार खुद पर बहुत परिश्रम करना होता है सब की किस्मत नहीं होती है अच्छी कुछ को तो जीवन के हर मोड़ पर कड़ी मेहनत करनी होती है∣ 









 



 


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