Skip to main content

जानें, क्यों मनायी जाती है गणेश चतुर्थी




 पौराणिक मान्यताओं के अनुसार   भाद्रपद की चतुर्थी को गणेश (Ganesh) जी का प्राकट्य हुआ था जिसे गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) के रूप में मनाया जाता है ∣ गणेश प्रथम पूज्य देव है जिनके पूजन के वगैरह कोई और  अन्य धार्मिक कार्य सफल नहीं होते  है ∣ इनके पूजन से सभी तरह के मनोरथ पूर्ण होते हैं ∣ मान्यताओं के मुताबिक, अगर गणेश का पूजन सच्चे मन से किया जाएं, तो वो अपनेभक्तों  के सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं

कैसे हुई थी, उत्पत्ति गणेश की

ऐसा माना जाता है कि देवी पार्वती ने अपने शरीर के मैल से एक मूर्ति बनाकर उसमें जान डाल दी थी जिसे उन्होंने अपने पुत्र के रूप में मान्यता दी थी, जब वो स्नान करने जाती है तब वो अपने द्वारपाल के तौर पर इनकी नियुक्ति करती है किन्तु जब भगवान शिव पार्वती से मिलने के लिए आते हैं ∣ तब दोनों पिता, पुत्र में भंयकर युद्ध छिड़ जाता है ∣ जिसमें उनका मस्तक अपने पिता के प्रहार से शरीर से अलग हो जाता है ∣ तब भगवान शिव उनके मस्तक में गजानन का सिर जोड़ देते हैं ∣ तब ही से उनका नाम गणेश कहलाया  ∣

क्यों होती है? प्रथम पूज्य देव के रूप में उनकी पूजा

 पौराणिक कथाओं के मुताबिक, जब देवताओं में ये प्रश्न उठा कि प्रथम पूज्य देवता किसे बनाया जाएं ? इसके लिए एक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया भगवान शिव के द्वारा ये बात कही गयी जो इस प्रतियोगिता में पृथ्वी का तीन चक्कर लगाकर सबसे पहले आ जाएगा वही प्रथम  पूज्य देव कहलाएगा ∣ इस प्रतियोगिता में 
गणेश जी ने अपने बुद्धि के प्रयोग से अपने माता पिता के चक्कर लगाकर  इस प्रतियोगिता में विजय हासिल की ∣ तब से इन्हें प्रथम पूज्य देव के रूप में जान जाने लगा ∣

मूर्ति स्थापना को लेकर क्या है ? मान्यताएं

भाद्रपद माह की चतुर्थी के दिन गणेश जी प्रतिमा को घर में स्थापित किया जाता है ∣ ऐसी मान्यता है कि वो इन दस दिन धरती पर भ्रमण करने आते हैं ∣ अपने भक्तों संग रहते हैं ∣ 





Comments

Popular posts from this blog

Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..