जब पहली बार ससुराल गयी लड़की को अपने मायके आने के लिए इन त्यौहारों का बेसब्री से इंतजार रहता था ∣ वहीं दूसरी तरफ घर के सभी लोगों को बेटी के घर आने की राह देख रहे होते हैं ∣
आज जिंदगी की भागदौड़ में जहां किसी को फुर्सत नहीं है किसी की बात सुनने की ,ऐसे समय में त्यौहार ही तो है जो एक वक्त ठहर कर आपस में लोगों को संवाद करने का मौका देते है ∣
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