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बात क्यों नहीं




आजादी के 75 साल हो ग ए हैं ∣ फिर भी आज  हम लोग पीरियड्स के बारे में बातें करने से दूर भागते है ∣ एक आधुनिक समाज में रह रही लड़की आज भी सैनेटिरी नैपकिन खरीदने से लेकर उसके इस्तेमाल की बात लोगों से बहुत गुप्त रखनी पड़ती है∣ जो गाँव में नहीं अपितु शहर में भी बड़ा गुप्त रखा जाता है ∣
जबकि इस पर खुलकर कर बात किए जाने की आवश्यकता है आज भी लड़कियों को पीरियड्स के नाम लेने की जगह उसके  लिए 'बर्थ डे' हो गया , मैं चल रही हूँ, मेरे वो दिन चल रहे जैसे नामों का उपयोग करना पड़ता है ∣

आज समय की जरूरत है सेक्स एजुकेशन पर बात करने की जिससे हम कल बेहतर समाज दे सके , साथ ही लड़कियों के पीरियड्स में हो रहा तनाव ठीक हो वो इसको लेकर शर्म महसूस न करें ∣


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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..