अब कर्तव्य की बात हो जाए


यू तो हम बात बात पर अपने अधिकारों का हनन हो जाने पर न्याय की बातें करते हैं ∣ ये उम्मीद करते हैं कि न्यायालय से हमें सही न्याय मिलेगा, हमारे साथ किसी भी तरह का अन्याय नही होगा किन्तु सड़क से लेकर घर तक हम अपने मूलभूत कर्तव्यों का अनादर ऐसे करते हैं जैसे हमारा उससे दूर दूर तक कोई नाता ही नहीं है ∣ 

अगर हमें देश को बेहतर करना है तो हमें स्वयं आगे आना होगा बात चाहे स्वतंत्रता की हो, स्वच्छता की हमें शुरूआत खुद से करनी होगी तब ही कुछ काम होगा ∣


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