अभिव्यक्ति की आजादी पर निरकुंश लगाने की कोशिश



कितनी अजीब विडंबना है एक तरफ पूरा देश आजादी के 75 साल के चलते आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है दूसरी तरफ  एक प्रतिष्ठित लेखक पर उसके लेखन के लिए उस पर हमला कर दिया गया, बिना उसकी परिणति को जाने बगैर , आजादी पर हम सब का हक है पर किसी जीने का अधिकार छीन लेना कहां तक उचित है ∣ 



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