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क्या थी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की कहानी, जिसने दिलाई भारत को आजादी





भारतीय इतिहास में सबसे  महत्वपूर्ण  साल 1757 से 1857 है जिसमें सन् 1757 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने प्लासी की लड़ाई में बंगाल के नवाब को हराकर भारत के उपमहाद्वीप में अपना राज्य स्थापित करने का पहला मौका पाया था ∣
वहीं भारत के लोगों ने अंग्रेज़ों से स्वाधीनता प्राप्त करने के लिए 1857 से लेकर 1947 तक कई तरह के जन आंदोलन किए थे,  जिसका उद्देश्य अंग्रेज़ों की गुलामी से देश को आजाद कर एक नये भारत को लाना था ∣


जिसमें  कुछ घटनाएं  प्रमुख है -
 
1.1857 का पहला स्वंतत्रता संग्राम

1857 का स्वंतत्रता संग्राम सैनिक विद्रोह और पहला स्वतंत्रता संग्राम के नाम से भी जाना जाता है ∣ इसे पहला स्वतंत्रता संग्राम कह जाने का कारण ये था कि इसमें जनसेवक, किसान और भारतीय शासकों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया था ∣ इसकी शुरुआत मेरठ के सैन्य कर्मियों के विरोध से शुरू हुई थी ∣


2.भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना सन् 1885 में सुरेन्द्र नाथ बैनर्जी के द्वारा की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य मध्यमवर्गीय शिक्षित नागरिकों के विचारों को आगे लाना था।  सन्  1906 में कलकत्ता में कांग्रेस के अधिवेशन के दौरान स्वराज प्राप्ति की घोषणा की थी। उसी के  साथ स्वदेशी आंदोलन का शुभारंभ हो गया था ∣

3. बंगाल विभाजन

ब्रिटिश सरकार ने सन् 1905 में बंगाल विभाजन कर देश की राजधानी कलकत्ता से बदलकर दिल्ली स्थानांतरण कर दिया था  जब इस विभाजन के  खिलाफ  विद्रोह के स्वर तेज होने लगे,तब  ब्रिटिश सरकार ने 1909 में कई सुधारों को लागू किया।इन्हींं में से एक 'मार्ले-मिंटो सुधार 'के नाम से जाना जाता है। इसका उद्देश्य विकास  की जगह हिंदू और मुस्लिमों में मतभेद पैदा करना था या कहा जाए त़ो 'फूट डालो और राज करो' की नीति को अंगीकार करना था ∣
4. महात्‍मा गांधी की वापसी
1915 में  मोहनदास करमचंद गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटकर आए . जो अपने साथ भारत की आजादी के लिए एक नयी आशा को लेकर आए थे। ये बात और थी कि उस समय  न वो महात्मा थे और न ही बापू। लेकिन खेड़ा सत्‍याग्रह, चंपारण सत्‍याग्रह, स्‍वदेशी आंदोलन, असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन के गांधी देश राष्ट्रपिता से लेकर बापू कहलाएं। गांधी ने अंहिसा का सहारा लेकर भारत को आजाद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
5. जालियांवाला बाग नरसंहार
जालियांवाला बाग नरसंहार 13 अप्रैल 1919 को  वैशाखी के दिन हुआ था ∣ उस दिन एक शांति पूर्ण सभा रखी गयी थी, जिसका कारण पंजाब के प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया जाना था ∣ जिसमें डाॅ. सत्यपाल और सैफुद्दीन किचलू थे  इस सभा में जनरल डायर ने  जलियांवाला बाग में अपनी सेना के साथ पहुंचा और उसने मुख्य दूवार पर तोपें डाल दी और आदेश दिया कि जब तक पूरे लोग मर नहीं जाते हैं तोपों को बंद मत करना ∣ इस नरसंहार में करीब एक हजार लोग मारे गए ∣
6. असहयोग आंदोलन

1920 से  1922 के बीच महात्‍मा गांधी और भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्‍व में असहयोग आंदोलन चलाया गया। जिसने भारतीय  भारतीय स्‍वतंत्रता को एक नया आयाम  दिया था ∣ जिसके चलते स्कूल के छात्रों ने स्कूल जान बंद कर दिया गांव से लेकर शहरों के श्रमिकों ने काम पर जाना बंद कर दिया ∣

7.भारत छोड़ो आंदोलन

जब महात्मा गांधी को ये अहसास हो गया कि अंग्रेज़ों से उन्हें किस भी तरह का न्याय नहीं मिल सकता है ∣ तब उन्हें पूरे देश को सम्बोधित कर अंग्रेजों के लिए 'भारत छोड़ो नारा' दिया ∣ 8 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन को शुरू किया ∣ इसका अनुसरण कर देश भर में रैलियां निकाली गयी  ∣
इस आंदोलन की परिणति ये रही कि पंडित जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गाँधी, और मौलाना अबुल कलाम आजाद जैसे नेताओं को अंग्रेजों के द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया  ∣ इन सभी आंदोलनों के फलस्वरूप अंग्रेजों को भारत छोड़ने को मजबूर होना पड़ा   ∣ 

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम देश के लिए स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाने वाला इतिहास बनाया गया, जिसमें भारत ने अंग्रेजों से लोहा लेकर भारत को आजाद करने का सपना साकार किया ∣ 














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हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..