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परिपक्व बनने की प्रक्रिया के बीच में


इंसान में परिपक्वता एक समय के बाद आ ही जाती है ∣ जब वो सही गलत में फर्क समझने लगता है ∣ जानने लगता है कि उसके लिए गलत क्या है और सही चीज क्या है? 
वो दुनिया के साथ आगे बढ़ने लगता है ∣ कुछ लोग जिंदगी के अनुभवों के चलते परिपक्व बन जाते हैं ∣ कुछ लोग को बनना पड़ता है ∣
एक समय के बाद लोग ये समझ ही जाते है कि व्यक्ति के जीवन की सार्थकता अच्छे बुरे पलों में अपने काम को करते रहने में है ∣ 
उसे जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए जोखिम लेना ही पड़ता है ∣ बिना जोखिम के इस दुनिया में कुछ भी संभव नहीं है ∣ किंतु जोखिम कहां लेना है ये व्यक्ति परिपक्व होने के बाद ही समझ पाता है ∣ 

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..