परिपक्व बनने की प्रक्रिया के बीच में


इंसान में परिपक्वता एक समय के बाद आ ही जाती है ∣ जब वो सही गलत में फर्क समझने लगता है ∣ जानने लगता है कि उसके लिए गलत क्या है और सही चीज क्या है? 
वो दुनिया के साथ आगे बढ़ने लगता है ∣ कुछ लोग जिंदगी के अनुभवों के चलते परिपक्व बन जाते हैं ∣ कुछ लोग को बनना पड़ता है ∣
एक समय के बाद लोग ये समझ ही जाते है कि व्यक्ति के जीवन की सार्थकता अच्छे बुरे पलों में अपने काम को करते रहने में है ∣ 
उसे जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए जोखिम लेना ही पड़ता है ∣ बिना जोखिम के इस दुनिया में कुछ भी संभव नहीं है ∣ किंतु जोखिम कहां लेना है ये व्यक्ति परिपक्व होने के बाद ही समझ पाता है ∣ 

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