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जब संवेदना खत्म सी होने लगे


https://drive.google.com/file/d/1fY5k-oiRzGe4iKmZ0EPaYzdakIY0J4oW/view?usp=drivesdk 
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समय के साथ हम बदलते जा रहे हैं इसमें कोई बुराई नहीं है हमारी सोच समय के साथ आधुनिक हो रही है इसमें भी कोई गलत बात नहीं है∣ लेकिन जब हमारे अंदर की संवेदना कम सी होने लगे तब एक बार खुद की तरफ सोचने की जरूरत है∣

इस दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं एक वो जो दूसरों के दुख और सुख में उनके साथ खड़े हुए होते हैं, दूसरे वो लोग होते हैं जो सुख में तो उनके साथ खड़े हुए होते हैं पर दुख मे जैसे ़़वो उन लोगों को जानते  ही नहीं है∣  

आज हम में संवेदना खत्म सी होने लगी है∣ हम दूसरे के दुख में खड़े होने की वजाय उनका साथ देने से भी पीछे हटने लगे हैं केवल इसलिए की ये हमारी परेशानी नहीं है∣ 

जब हम सब ऐसा सोचते हैं तो हमें ये चीज नहीं भूलना चाहिए कि इंसान और पशु में केवल फर्क इतना ही है कि इंसान दूसरे के साथ अच्छे बुरे समय में उसके साथ खड़े होने के लिए बना है∣ अगर वो ऐसा नहीं करता है तो उसमें और पशु में कोई भी अंतर शेष नहीं है∣
 

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