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असमानता घटने की जगह फिर बढ़ी

 एक बार फिर लैंगिक समानता (Gender Equality) पर आयी रिपोर्ट जिसमें 146 देशों (Countries)में भारत का स्थान 135 वां है  हम सब का ध्यान इस ओर आकर्षित किया है ∣ कि अभी देश में कितनी असमानता है ∣ भले ही हर साल देश में लाखों  लड़कियां डिग्री लेकर निकलती है लेकिन उच्चे पदों पर बैठी महिलाओं का प्रतिशत आज भी बहुत ज्यादा नहीं है ∣

सीईओ के पद पर बैठी महिलाओं का प्रतिशत केवल 3.8 तक है ∣ जबकि उनकी जनसंख्या देश में 68℅ है ∣ कोरोना काल से पहले कामकाजी महिला का प्रतिशत 30  था जो अब घटकर 13 प्रतिशत हो गया है जिसने असमानता की रेखा को ओर ज्यादा गहरा किया है ∣

आज इसे सुधारने के लिए जरुरी कदम उठाना जरूरी है इसमें महिलाओं की सुरक्षा से लेकर,असमान वेतन की समस्या पर ध्यान देना होगा उसके लिए सख्त कानून बनाना होगा मातृत्व अवकाश एक समस्या न  होकर महिला के लिए एक वरदान साबित हो ,इसके लिए जरूरी कदम उठाना होगा ताकि वो जब वापसी करें तो उसमें एक आशा हो खुद को आगे बढ़ाने की ∣

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..