परीक्षा चाहे जिंदगी की हो या स्कूल, काॅलेज की सबके लिए पढ़ाई करनी ही होती है ∣
फर्क़ महज इतना हो जाता है कि जीवन की परीक्षा देने के लिए हमें पढ़ना नहीं होता है ∣ वहां हम परीक्षा को देकर कुछ सीखते हैं ∣ जो स्कूल की परीक्षा के मुकाबले काफी कठिन होती है ∣ जहां पर हमारा सामना उस समय से होता है ∣ जिसकी हमने कभी भी कल्पना नहीं की थी ∣
जहां पर पास होने के लिए हमें 33 नंबर बल्कि धैर्य और समर्पण की जरूरत होती है ∣
इसी बीच कई बार जिंदगी हमें ऐसे मोड़ पर ले आती है ∣ जहां पर पहले हमें जीवन की और फिर स्कूल काॅलेज की परीक्षा देनी होती है ∣ ये हमारे लिए जब और मुश्किल हो जाता है ∣ जब हमारा सामना अपने अतीत और वर्तमान से होता है ∣
जिंदगी में एक परीक्षा ही होती हैजो हमें मुश्किल घड़ी में भी वो सीखा जाती हैजो हम जीवन की सामान्य घड़ी में भी सीख नहीं पाते हैंइसलिए तो कहती है किसी की सफलता से ईर्ष्या करने की वजाय उसके सामने खड़े होने के काबिल बने ∣

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