Skip to main content

जरूरत के साथ अक्सर चीजें बदल जाती है

 

जो जरूरत में काम आया वहीं दोस्त कहलाता है∣ पर ये बात अक्सर जब गलत साबित हो जाती है∣ जब काम निकल जाने पर हम उसे ऐसे बदलते देखते हैं∣ जैसे वो कभी  हमारा था ही नहीं∣

ऐसा नहीं है कि उन पुरानी चीजों की याद हमें आती नहीं है पर अक्सर समय के साथ नयी चीजें पुरानी चीजों की जगह ले ही लेती है∣

किसी की जरूरत तो कोई भी बन जाता है∣ पर आदत और दिललगी बहुत कम से ही होती है∣

समय समय का फर्क होता है∣  अक्सर जिंदगी के अनुभव के साथ हमारी आदत बदल जाया करती है∣ एक समय होता है जब हम अपनी पसंद की चीज को पाने के लिए हजार दुकानें खोजते है∣ पर एक समय के साथ एक ही दुकान में हमें सब चीजें पसंद आने लगती है∣ तब हम नहीं हमारी परिस्थितियां बदलती है∣

कोशिश कीजिए किसी की आदत बनने की क्योंकि जरूरत तो कोई भी पूरा कर देता है  पर आदतें अक्सर चाहकर भी नहीं बदली जाती है∣ 


Comments

Popular posts from this blog

Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..