जो जरूरत में काम आया वहीं दोस्त कहलाता है∣ पर ये बात अक्सर जब गलत साबित हो जाती है∣ जब काम निकल जाने पर हम उसे ऐसे बदलते देखते हैं∣ जैसे वो कभी हमारा था ही नहीं∣
ऐसा नहीं है कि उन पुरानी चीजों की याद हमें आती नहीं है पर अक्सर समय के साथ नयी चीजें पुरानी चीजों की जगह ले ही लेती है∣
किसी की जरूरत तो कोई भी बन जाता है∣ पर आदत और दिललगी बहुत कम से ही होती है∣
समय समय का फर्क होता है∣ अक्सर जिंदगी के अनुभव के साथ हमारी आदत बदल जाया करती है∣ एक समय होता है जब हम अपनी पसंद की चीज को पाने के लिए हजार दुकानें खोजते है∣ पर एक समय के साथ एक ही दुकान में हमें सब चीजें पसंद आने लगती है∣ तब हम नहीं हमारी परिस्थितियां बदलती है∣
कोशिश कीजिए किसी की आदत बनने की क्योंकि जरूरत तो कोई भी पूरा कर देता है पर आदतें अक्सर चाहकर भी नहीं बदली जाती है∣
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