दूरी जब रास्ते से बढ़कर दिलों से दिमाग तक पहुंच जाती है ∣ तब वो एक ऐसा रुप ग्रहण कर लेती है ∣ जिसे मिटाना लगभग मुश्किल हो जाता है ∣
एक ओर आज जहां हम अपनों से दूर जाते जा रहे हैं ∣ वहीं दूसरी तरफ हम ऐसे लोगों के पास आने की फिराक में है ∣ जिनके बारे में हम ज्यादा नहीं जानते हैं ∣
आज बिगड़ते हुए रिश्ते को बचाने के लिए एक बार फिर जरूरी है अपने अंदर की संवेदना को पुन : जागृत करना उन मूल्यों को समझना जिनके चलते हमें मानव होने की पहचान मिली है ∣
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