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आज के समय में संवादहीनता

 

आज के समय में संवाद करना जैसे हम भूलते सा जा रहे हैं ∣ एक समय था जब हम अनजान इंसान से भी ऐसे बात करते थे जैसे वो हमारा पहचान का है ∣ जहां हम कभी उसकी मदद करने में अनजान होकर करने भी  हिचकिचाते नहीं थे , उसे त्यौहार की मुबारक़ देने में बिल्कुल भी शर्माते नही थे∣

एक आज का दौर है जहां सोशल मीडिया पर हमारे हजार दोस्त है पर वास्तविकता में उसकी संख्या बहुत कम है ∣

इस बात को करते हुए मुझें हिन्दी साहित्य के लेखक निर्मल वर्मा का वो निबंध 'आदि और अंत 'याद आ रहा है जिसमें वो कहते हैं 'कि आज जहां वैश्वीकरण के दौर में पूरी दुनिया सिमटकर रह गयी है जहां थोडै ही समय में हम एक से दूसरे देश के लोगों से बातचीत कर सकते हैं उस देश को जान सकते हैं ∣ वहीं दूसरी तरफ आज हमें अपने पड़ोसी के बारे में बहुत कम मालूम है हम जैसे उसके हाल चाल लेना भूल सा गए है ∣

आज वर्तमान समय में जरूरत है कि हम लोगो से प्रत्यक्ष रूप में भी बातचीत करें जिससे न सिर्फ हमारा संचार करने का तरीका ठीक होगा बल्कि हम अपने आस पास के लोगों के बारे में भी जानेंगे ∣ 




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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..