गांव की परिभाषा अब बदलने लगी है
घर पर नहीं है अब हल्दी के हाथ
मिट्टी की खुशबू कम सी होने लगी है ∣
फिर भी आज जो चीज मौजूद है
वो है सबके प्रति स्नेह
जहां कोई व्यक्ति किसी के लिए पराया नहीं है ∣
जहां मिठास गुड़ से ज्यादा है लोगों की भाषा की
जहां आज भी तहजीब बाकी है ∣
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