कुछ भी पढ़ा हुआ कभी बेकार नहीं जाता



वैसे तो हम सब स्कूल से लेकर कॉलेज तक कुछ न कुछ पढ़ते रहते हैं जिसमें कुछ हमारे विषय से जुड़ा हुआ होता है ∣ तो कुछ हमारी सोच से कही आगे का विषय होता है जिसे हम पढ़ते वक्त सोचते हैं कि भला ये हमारे क्या ही काम आएगा ? 

और फिर हम इस आवेश में  हम उसे अधूरा छोड़कर आगे की ओर बढ़ जाते हैं यही ंसे शुरू होता है ∣ हमारी सोच का संकुचन जो हमें बहुत सीमित कर देता है ∣ किन्तु इसके विपरीत अगर हम उसको पूरा पढ़ डालते हैं तो उस समय तो वो हमें निरर्थक लगता है ∣ किन्तु समय का पहिया जब आगे की ओर चलता है ∣ तब एक वक्त ऐसा भी आता है ∣ जब हमें वो पढ़ी  हुई  चीज काम आ जाती है ∣

 जिंदगी में अगर तुम्हे  कुछ पाना है त़ो खुद को सीमित मत करों, अपनी सोच ओर अपने दायरें को बढ़ाओ़ सफलता अपने आप तुम्हें मिल जाएगी  ∣ 

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