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लोकतंत्र में लोकसेवकों की भूमिका

 

लोकतंत्र जिसकी परिभाषा 'जनता के लिए जनता के द्वारा बनाया गया शासन है' जिसमें जनता का प्रतिनिधित्व होता है∣


 
ये एक ऐसी शासन प्रणाली होती है जिसमें जनता अपने शासक का चयन स्वयं करती है∣

जब बात एक लोकतंत्र वाले देश में लोकसेवकों की भूमिका की आती है∣ तब हमें ये जानना आवश्यक होता है कि लोकसेवक आखिर होता कौन है ? 

लोकसेवक एक ऐसा सेवक होता है जो न तो राजनीतिक अधिकारी होता है न ही न्यायिक अधिकारी जिसे असैनिक रूप में जनता की सेवा करने हेतु नियुक्त किया जाता है∣ वह लोकसेवक कहलाता है∣ जिसे संसद के द्वारा पारिश्रमिक दिया जाता है∣

अगर हम इसके इतिहास पर गौर करें तो जानेगें, कि आजादी के पहले लोक सेवक की ब्रिटिश शासन के लिए कार्य करते थे∣ ये  आमतौर अंग्रेज ही होते थे∣ 

जिसमें उनका मुख्य कार्य अंग्रेज़ो की गुलामी कर, जनता का शोषण कर उनसे धन अर्जन करना होता था∣ किन्तु आजादी के बाद जब अंग्रेज भारत छोड़कर चले गए तब भारतीयों ने इसकी बागडोर सम्भाली और भारत के लिए कार्य करने की सोची∣

हालांकि वे लोग इसके लिए प्रशिक्षित नहीं थे∣ जिसके कारण लोकसेवकों की कार्यकुशलता में कमी आयी∣

किन्तु समय के साथ उन लोगों ने अपनी जिम्मेदारी समझी और देश के विकास में अपना योगदान दिया जो आज भी सतत जारी है∣ 

आज किसी भी योजना के सही क्रियान्वयन में जितना सरकार की सफलता होती है उससे कही ज्यादा एक लोकसेवक की होती है क्योंकि वो लोग इस योजना को लाने से लेकर उसे लागू करने तक के सभी काम करते हैं ∣


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कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

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पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..