Skip to main content

नागरिक होने के नाते


एक नागरिक होने के नाते हमारे पास क्या अधिकार है और उनकी जरूरत हमें क्यू है इसकी जानकारी हमें है ∣ जिसका जरूरत पड़ने पर हम उपयोग भी करते हैं किन्तु जब बात कर्तव्य को पूरा करने की होती है तब हम उससे पीछे हटने लगते हैं ∣ हमें लगता है कि इसकी जिम्मेदारी से भला हमारा क्या ही फायदा होगा ∣

जबकि अगर हम अपने अधिकारों की तरह अपने कर्तव्य का निर्वहन सही ढंग से करेंगे तो न केवल हमारा बल्कि हमारे आस पास के लोग का भी बहुत फायदा करेंगे ∣
उदाहरण के लिए अगर हम किसी ऐसे स्थान पर जाते हैं जो कि बात करता है सार्वजनिक स्थल की देख रेख करने की
वहां की व्यवस्था को बनाएं रखने की 
तो हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए 
कि जिस तरह हम अपने घर की सफाई करने में कोई कसर नही छोड़ते उस तरह हम उन स्थल की सफाई रखें  ∣

Comments

Popular posts from this blog

Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..