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डाॅ भीमराव आम्बेडकर

 


 किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व को समझने के लिए उसका 
 सामाजिक , आर्थिक, पारिवारिक, और भौतिक परिवेश को समझा जाना जरूरी होता है क्योंकि उस व्यक्ति पर उसका विशेष प्रभाव होता है ∣
एक अमीर व्यक्ति का बच्चा अमीर बने तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं होती किन्तु जब एक गरीब व्यक्ति का बच्चा अमीर और ताकतवर बने इसमें आश्चर्य करने की बात होती है  ऐसा करने के लिए उसे बहुत परिश्रम करना होता है ∣
 
जहां दूसरे देशों में व्यक्ति की उन्नति के लिए उसकी शिक्षा और आर्थिक कारक उस पर प्रभाव डालते हैं ∣ वही भारत में व्यक्ति पर  प्रभाव  उसकी जाति डालती है ∣ जो व्यक्ति के भाग्य निर्धारण में अन्य कारकों की तुलना में  अधिक प्रभावी होती है ∣ 

 भारत में निम्न जाति में पैदा होना व्यक्ति के लिए अभिशाप जरूर बना है किन्तु इसके बावजूद सभी युग में ऐसे लोग पैदा हुए है जिन्होंने अपनी जाति से उठकर सम्मान जनक स्थान प्राप्त किया है ∣ जिनमें बाल्मीकि बधिक, वशिष्ठ वेश्यापुत्र, व्यास है∣

कर्ण का पालन भी निम्न कुल में हुआ था∣ एकलव्य सा महान वीर साधारण कुल में ही पैदा हुआ  ∣ सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य दासी पुत्र थे ∣ मध्ययुग में कबीर, दादू, रैदास, ये सब निम्न जाति में पैदा हुए थे ∣

फिर भी डाॅ भीमराव आंबेडकर की बात इन सबसे अलग थी क्योंकि जहां अन्य लोगों ने अपने समान दासता पूर्ण जीवन जीने वाले के लिए ज्यादा कुछ नहीं किया वहीं डाॅ भीमराव आंबेडकर ने केवल अपनी मुक्ति ही नहीं बल्कि अपने समाज के अन्य लोगों की मुक्ति के लिए भी एक रास्ता निकाला उन्हें सम्मान पूर्वक जीवन जीने का अधिकार दिलाया ∣  

तो चलिये आज जानते हैं डाॅ भीमराव आंबेडकर के बारे में, 

  डॉ.भीमराव आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 में मध्यप्रदेश के इन्दौर जिले के एक छोटे से कस्बे महू में हुआ था ∣ उनके पिता का नाम रामजी मालो जी सकपाल था ∣ वे ब्रिटिश सेना में सूबेदार के पद पर कार्यरत थे∣ भीम का परिवार मूलत : कोंकण क्षेत्र के रत्नागिरी जिले के दापोली तालुक के अम्बावडे गांव का रहने वाला था ∣ जिसकी वजह से शुरू में भीम का उपनाम आम्बाविडेकर था ∣

उनकी मां का नाम भीमाबाई था ∣ भीमराव अपने माता पिता की चौदहवीं संतान थे∣ वे अपने भाई - बहनों में सबसे छोटे थे ∣  जबकि उनसे बड़े भाई - बहनों में नौ की मृत्यु हो गई थी ∣ उन्हें मिलाकर केवल पांच पुत्र व पुत्रियों ही जीवित रहे ∣ इनमें तीन पुत्र व दो पुत्री थी ∣

 अगर हम इनके सामजिक वातावरण की हम बात करें, तो भीमराव  जिस जगह पर रहते थे वहां पर  जाति को बहुत मानी जाता थी जिसके चलते वहां के लोग निम्न जाति के लोगों की परछाई  तक देखना  पसंद नहीं करते थे ∣ इस जाति के लोग न तो अच्छा घर बनावा सकते थे न ही अच्छे कपड़े पहन सकते थे, न ही अपने बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेज सकते थे ऐसे सभी काम इनके लिए वर्जित थे ∣

वही इनका पारिवारिक वातावरण देखें तो हम पाएगें, कि भीमराव के घर का वातावरण बहुत धार्मिक था ∣ उनके पिता को धार्मिक- साहित्य का अच्छा ज्ञान था साथ ही उन्हें विभिन्न अच्छे धर्मों के मतों और विश्वासों की अच्छी जानकारी थी ∣ उनके पिता नियमित रूप से सुबह व शाम, भजन पूजा व नाम - कीर्तन करते थे ∣ वे ज्योतिराव फुले के मित्र थे ∣ महादेव गोविन्द रानाडे से भी उनका परिचय था ∣

डाॅ भीमराव आंबेडकर को शिक्षा लेने के लिए बहुत ज्यादा संघर्ष करना पड़ा क्योंकि वो जिस जाति से आते थे उस जाति के लोगों को उस समय शिक्षा लेने का अधिकार नहीं था ∣ जिसके लिए उनके पिता ब्रिटिश शासन में अर्जी लगाई थी∣ 
सतारा के लश्करी छावनी स्कूल में उनकी शिक्षा प्रारंभ हुई ∣ भीम जब नौ वर्ष के हुए तो उन्होंने सतारा के हाईस्कूल में अंग्रेजी की पहली कक्षा में प्रवेश लिया ∣

भीमराव को संस्कृत पढ़ाने का बहुत शौक था किन्तु जब वे सतारा के माध्यमिक स्कूल में चौथी कक्षा में गये तो अछूत जाति में पैदा होने की वजह से उन्हें संस्कृत भाषा पढ़ने में नहीं मिली आगे चलकर उन्हें विवश होकर फारसी का अध्ययन किया ∣

1906 में उन का विवाह भीकू कल़ांगकर की पुत्री रमाबाई से हुआ ∣ उस समय उन्होंने केवल दसवीं पास की थी ∣ सन् 1907 में भीम ने मौट्रिक की परीक्षा सन् 1910 में एल्फिंस्टन कालेज से भीमराव ने इंटरमीडियेट की परीक्षा उत्तीर्ण की ∣ सन् 1912 में भीमराव ने बी.ए. की परीक्षा पास की ∣

सन् 1913 में बड़ौदा सरकार की ओर से आम्बेडकर को अमेरिका में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए छात्रवृति हासिल हुई∣ उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए आम्बेडकर 12 जुलाई 1913 को यूयार्क पहुंचे ∣ उन्होंने कोलम्बिया विश्विद्यालय में दाखिला लिया ∣ वे नियमित रूप से 18 घंटे पढ़ाई करते थे ∣

उन्होंने " द एडमिनिस्ट्रेशन एण्ड फाइनेंस आफ द ईस्ट इंडिया कम्पनी " शीर्षक पर उन्होंने विश्विद्यालय में शोध प्रबंध प्रस्तुत किया जिस पर उन्हें एम.ए. की उपाधि प्राप्त हुई∣ म ई 1916 में प्रसिद्ध मानव वैज्ञानिक गोल्डन वीजर ने एक संगोष्ठी आयोजित की ∣  आम्बेडकर ने इस संगोष्ठी में " कास्ट्स इन इंडिया : देयर मेकेनिज्म, जेनसिस एण्ड डवलपमेंट " शीर्षक पर एक शोध पत्र प्रस्तुत किया ∣
इस शोध पत्र में उन्होंने भारत में जाति व्यवस्था की उत्पत्ति के संबंध में अपने विचार प्रस्तुत किये और दर्शाया कि अन्तर्विवाह जाति व्यवस्था का आधारभूत तत्व है ∣
 
एम ए का अध्ययन करने के बाद उन्होंने पीएचडी के लिए शोध कार्य किया 
कोलम्बिया विश्विद्यालय में ही सन् 1916 में उन्होंने डाॅ क्टरेट की उपाधि के लिए " नेशनल डिविडेंड फार इंडिया - अ हिस्टारिकल एण्ड एनालिटिकल स्टडी " शीर्षक पर शोध प्रबंध प्रस्तुत किया 

सितम्बर 1917 में वे भारत आ गए अपनी शिक्षा के अनुसार उन्होंने बड़ौदा रियासत में नौकरी शुरू की ∣

इस तरह उन्हें अपने जीवन में संघर्ष कर न सिर्फ स्वयं को ज्ञान के प्रकाश में लाकर प्रकाशमय किया बल्कि अपने जैसे उन लोगों के लिए जीवन में प्रेरणा बने जो लोग शिक्षा जैसे मूल अधिकार से वंचित हैं केवल इसलिए  क्योंकि वो निम्न जाति से आते हैं ∣ 

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