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पर्यावरण


 


वैसे तो हम पर्यावरण की परिभाषा बचपन से ही पढ़ते आ रहे हैं कि हमारे चारों ओर घेरे हुए आवरण को पर्यावरण कहते हैं ∣ 

जिसमें कुछ निजीव चीजें जैसे कुर्सी, टेबल और सजीव में मानव, पशु, पक्षी ह़ोते है ∣ 

वही वो स्त्रोत जो हमें  प्रकृति के द्वारा मिलते  हैं ∣ जिसे एक बार उपयोग करने के द्वारा पुन : प्राप्त नहीं किया जा सकता है वो अनवीकरणीय स्त्रोत कहलाते हैं ∣ 

इसके विपरीत वो स्त्रोत जो एक से अधिक बार  उपयोग में लाए जा सकते हैं नवीकरणीय स्त्रोत कहलाते हैं ∣

आज न केवल हमारे चारों ओर का आवरण बल्कि  नवीकरणीय और  अनवीकरणीय स्त्रोत का दोहन हो रहा है जिसे  बचाना अब बहुत जरूरी हो गया है ∣

एक ओर विकास के नाम पर  जहां लाखों करोड़ों पेड़ ऐसे ही काटे जा रहे हैं ∣ वही दूसरी ओर जल की कमी अभी से देश में दिखाई देने लगी है ∣ जिसके लिए समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो वो दिन दूर नहीं जब हम पानी को पेट्रोल की तरह खरीदेगें जो भारत में कुछ स्थान पर खरीदा भी जाता है ∣

आज जहां हम तेजी से आधुनिकीकरण में प्रवेश कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ हम अपने कई प्राकृतिक स्त्रोत का दोहन केवल अपनी जरूरत के लिए कर रहे हैं ∣ 

जिसे बचाने के लिए हम केवल कागजी प्रयास करते नजर आ रहे हैं ∣

आज केवल सरकार ही नहीं अपितु आम इंसान को भी समझना होगा कि जलवायु परिवर्तन से लेकर, प्रकृति के सिकड़ते साधन हमारे कल के लिए ही नहीं बल्कि हमारे आज के परेशानी बन गया है∣  जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण हम ये भीषण गर्मी देख रहे हैं जिसके चलते न केवल इंसान बल्कि हमारे वन्य जीव की भी हालात खराब है ∣ 


आज वर्तमान समय में हम सब को अपने जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणाम को देखते हुए उसे बचाव के लिए कोई तत्काल कदम उठाना होगा ∣


 

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Today Thought

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हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..