सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली रामचरित मानस के बारें में तो हम सब जानते हैं ∣ पर क्या हम ये जानते हैं कि उसके पीछे का कारण क्यूं आज भी राम का जीवन हर भारतीय के लिए आदर्श है ?
तो चलिए आज हम जानेंगे, राम के उन कुछ गुणों के बारें में जिससे हम अब तक है अनजान
1.कर्तव्यनिष्ठता
हम सब के कर्तव्यों को पूरा करने के मानक के अलग- अलग होते हैं ∣ कोई इसके लिए ज्यादा गम्भीर होता है तो कुछ के लिए महज ये सिर्फ एक काम होता है ∣ जिसे उसे किसी भी हाल में पूरा करना होता है ∣
जब इसे हम राम की दृष्टि से देखते हैं तो पाते हैं कि राम के लिए कर्तव्य को पूरा करना ही सबकुछ था जिसने अपनी सबसे प्रिय मां कैकेयी के वनवास जाने के आदेश पर लेष मात्र भी संदेह किए बगैर 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया उनसे बड़ा कर्तव्य पथ प्रदर्शक भला कौन हो सकता है ∣
2. एक पति की भूमिका में राम
राम के जीवन में वियोग तो जैसे स्थायी ही रह गया बात चाहे सीता के हरण की हो, या सीता का वनवास का हो जहां उन्हें गर्भवस्था में अयोध्या छोड़कर वनवास जाना पड़ा उसका दर्द जितना सीता ने झेल उतना ही राम ने सीता के वियोग की पीड़ा झेली थी ∣
जिन्होंने महल में रहते हुए भी सीता के जाने के बाद साधारण जीवन जीने की सोची जो पूरी अयोध्या के लिए तो राजा थे किन्तु अपने कक्ष में सीता से बिछड़े एक वियोगी मात्र थे
जिन्होंने सादे खाने से लेकर जमीन में सोने का प्राण लिया ∣
3 अपने पेशे का मान
कहते हैं जब एक इंसान राजा के स्थान पर आता है ∣ तब वो केवल राजा ही रह जाता है जिसके लिए सबसे पहले उसकी प्रजा होती है बाद में उसका परिवार जो सदैव अपने मुख पर एक हल्की सी मुस्कान लिए अपने सिंहासन पर विराजमान रहता है ∣ भले ही उसके जीवन में कितना कष्ट हो ∣
राम ने एक सच्चे राजा के रूप में अपनी भूमिका अदा कि जिन्होंने अपने जीवन का जरा सा भी वियोग अपने मुख पर दिखाई न देने दिया, राजा के रूप में अयोध्या के वासियों के लिए काम किया ∣
4 समानता का भाव
आज जहां देश में समानता का अभाव है ∣ जहां हर कोई खुद को बड़ा और दूसरे इंसान को छोटा समझ रहा है ∣ ऐसे में राम के जीवन से सिखा जा सकता है सबको लेकर अपने मन में समान भाव रखना किसी को जाति, रंग रूप देखकर उससे भेदभाव न करना ∣
आज समकालीन समय में जब मर्यादा का जिक्र भी कहीं दिखाई नहीं दे रही है ∣ जहां धर्म की जीत के अलावा सबका कुछ जीत रहा है ∣ ऐसे समय में जरूरी हो जाता है कि हम मर्यादा पुरुषोत्तम राम से सीखें जीवन को संयमित होकर जीना ∣
दूसरों से वैसा ही व्यवहार करना जैसा हम खुद के साथ होने की अपेक्षा रखते हैं ∣
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