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स्वरोजगार

 

स्वरोजगार आज भी देश में क ई लोगों की आजीविका का साधन बना हुआ है ∣ जिसके चलते न जाने कितने लोग अपनी पहचान बना चुके हैं ∣ 

और आज व़ो दूसरे लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं ∣ ऐसे ही कुछ लोग से मेरी बात मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में लगे रीजनल मेला में हुई जो कि 5 मार्च से 15 मार्च तक डीबी माॅल के मसाला इस्टीट्र के इधर पर भोपाल हाट बाजार के नाम से लगा हुआ है जिसे रीजनल मेला के नाम से भी जान जाता है ∣

जहां पर उतरप्रदेश से लेकर बिहार, झारखंड, राजस्थान के लोग आए हुए हैं 

जिसमें से मैंने एक राजस्थानी हस्तशिल्प व्यापारी से बात की तो जान ही कि वो राजस्थान से आए हैं व़ो ं और उनकी पत्नी दोनों ही व्यवसाय को कर रहे हैं ∣ जिसमें वो मिट्टी के दियों की सजावट, पूजन में उपयोग आने वाली थाली से लेकर लिखने वाली डायरियों में अपनी कला का इस्तेमाल कर उसे सुंदर बना रहे हैं 


इसके अलावा मैंने में उतरप्रदेश के बनारस से आयी बनारसी साड़ी भी देखी जो बनारस की शान हो चुकी है  ∣ 

  मध्यप्रदेश के सतना जिले में मझगमा  गाँव से आयी कुछ महिलाओं से बात की जो सजावट में उपयोग आने वाली लकड़ी से घर की सजावट बढ़ाने वाली वस्तुएं बना रही है जिसमें टोकरी, फूलों को रखने का पोट, आकर्षित करती हुई पेन रखने का बाक्स ले आकर आयी  ∣ 

इसके अलावा बालाघाट का शहद भी अपनी खुशबू बिखेर रहा है  जो अपनी शुद्धता और गुणवत्ता का परिचय अपने स्वाद से दे रहा है चर्चा के दौरान मुझे शहद को चखाने का मौका मिला ∣   

 


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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..