Skip to main content

लड़की हुई

 


अरे लड़की हुई है

घर में लक्ष्मी आयी है कहकर

अक्सर  लोग 

बेटी  के घर आने में बधाई स्वरुप दिलासा उसके घर को देते हैं, 


भले बड़ी बड़ी करेंगे बड़ाई 

बेटियों की पर अक्सर 

दूसरे घर जान कहकर 

पराई भी तो उसे ही कहते हैं, 

सीता के चरित्र पर सवाल उठाने वाले लोग

अक्सर क्यूं ये भूल जाते हैं

जनक दुलारी सीता की तरह आखिर 

 महलों में पली रानी 

को वन वन भटकते देखा 

किसी के आंखों में आसूं कही भी होते हैं, 

पूछे भला कोई उनसे की

जब   मुसीबत पड़ी तो काम किसने सबसे ज्यादा किया.

तब भी लोगों ने  उसे पराया किया

वो कही भी अपनी कहा समझी जाती है

माँ बाप के घर होती है

तो कहते हैं पराए घर में जाना है

ससुराल जाती है तो कहते पराए घर से आयी, 

नाता सबसे बनकर भी वो अक्सर 

किसी के घर की बहु, बेटी के अलावा

क्यों किसी घर की अपनी नहीं होती है, 

अक्सर उसे कम आंकने वाले कहां देते हैं

कि तु पराए घर की है क्या जाने

पर उसे भी तो कोई पूछे

उसके त्याग क्या कम होते हैं

जब जब आती है मुसीबत तब तब

नींद खराब उसकी होती है

जिम्मेदारी कभी जिसके लिए कम नहीं होती है

एक बेटी से लेकर माँ तक की भूमिका में

उसे देनी पड़ती है अनेक अग्नि परीक्षा 

फिर भी लोग कहते 

लड़की हुई है बधाई.

Comments

Popular posts from this blog

Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..