रूस के यूक्रेन पर आक्रमण ने एक बार फिर पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है ∣
जब तारीख 2 4 फरवरी को रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर अपनी सेनाओं के साथ मिलकर हमला बोला ∣ जो की यूक्रेन की राजधानी और उसका सबसे बड़ा शहर है ∣
उसके कुछ समय बाद ही 'संयुक्त राष्ट्र' जिसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विश्व में शांति स्थापित करने के लिए बनाया गया था उसने एक आपातकाल मीटिंग बुलाई जिसमें अमेरिका समेत कुछ देशों ने अपनी उपस्थिति दर्ज की साथ ही रूस के यूक्रेन पर आक्रमण की कड़ी निंदा की.
वही यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने संयुक्त राष्ट्र में रूस के खिलाफ एक कानून पारित करने की अपील की जिससे रूस का वीटो पावर खत्म किया सके, जिसमें संयुक्त राष्ट्र संघ के कुल 193 सदस्य में से 144 सदस्य ने वोट दिया जिसमें भारत , चीन और पाकिस्तान समेत 35 देशों ने कोई वोट ही नहीं दिया ∣
जबकि इस बिल के विरोध में बेलारूस, नार्थ कोरिया, सीरिया ने अपना वोट दिया था ∣
बता दे कि सयुंक्त राष्ट्र संघ के 193 सदस्य देशों में केवल पांच देश ही इसके स्थायी सदस्य है ; जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन और रूस,चीन, फ्रांस शामिल हैं ∣ जिनको सयुंक्त राष्ट्र से वीटो की शक्ति प्राप्त है जिसका अर्थ थ है ' मैं मना करता हूँ' अर्थात् जब सयुंक्त राष्ट्र में कोई कानून लाया जाए और उसके स्थायी सदस्य देश में से कोई एक देश उस कानून को पसंद न करें तो वो अपने वीटो शक्ति का उपयोग करके उस कानून को पारित होने से रोक सकता है ∣
वही दूसरी तरफ अमेरिका के द्वारा बनाए गए संगठन नाटो ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लागू करने की घोषणा की जिसका मुख्य उद्देश्य रूस को वित्तीय स्थिति को कमजोर करना है∣
बता दें, ये वही नोटो है जिसकी स्थापना द्वितीय विश्व के युद्ध के बाद सन् 1949 में एक सैन्य गंठबंधन के रूप में की गयी था जिसमें अमेरिका समेत वर्तमान में कुल 30 देश हैं ∣ जिसमें सबसे ज्यादा फंडिंग अमेरिका के द्वारा की जाती है ∣
इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों को सैन्य सुरक्षा प्रदान करना है ∣ जिसकी प्रासंगिकता हमने कोरियाई युद्ध के समय देखी थी जब अमेरिका ने युद्ध में दक्षिण कोरिया का साथ दिया था ∣
वही दूसरी तरफ इस सैन्य संगठन से मुकाबला करने के लिए सोवियत संघ ने सन् 1955 में पूर्वी देशों के साथ वारसा संधि की थी जिसका उद्देश्य नाटो से मुकाबला करना था ∣ जिसके सदस्य देश थे सोवियत संघ, पोलैंड, पूर्वी जर्मनी, चैकोस्लोवाकिया, हंगरी, रोमानिया और बुल्गारिया।
हालांकि सन् 1991 में सोवियत संघ के विघटन के साथ ही इस संधि का भी खात्मा हो गया था ∣
वही अमेरिका के द्वारा बनाया गया संगठन नाटो आज भी पूर्ण अस्तित्व में है ∣
और अभी नाटो चर्चा का विषय बन गया क्योंकि नाटो इसके 30 सदस्यों में से 24 नाटो देश यूक्रेन की सैन्य मदद के मदद कर रहे हैं ∣ हालांकि यूक्रेन अभी नाटो का सदस्य नहीं है.
वही रूस ने यूक्रेन हमला करने का कारण बताया है कि रूस को डर है कि कही यूक्रेन नाटो में शामिल न हो जाए अगर ऐसा हो जाएगा तो रूस अपने पडोसी देशो के साथ असुरक्षित महसूस करेगा हालांकि राजनीतिक विशेषज्ञ के द्वारा रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के अन्य कारण भी बताए जा रहे हैं ∣
अब देखना ये है कि रूस का दोस्त कहे जाने वाला चीन , भारत रूस और यूक्रेन के युद्ध को लेकर कब तक तटस्थ रहते हैं ∣
वही जहां एक ओर रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को एक हफ्ते से ज्यादा वक्त हो गया है ∣ वही दूसरी ओर एक फिर पूरी दुनिया दो हिस्से में विभाजित हो गयी है ∣ जहां एक तरफ रूस और दूसरी तरफ यूक्रेन का साथ देने वाले लोग है ∣ जिसका विश्व में भले अभी ज्यादा प्रभाव दिखाई न दे किन्तु आने वाले समय में इस युद्ध के दूरगामी परिणाम होगें ∣
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