मनुष्य की मूलभूत आवश्यकताएं रोटी, कपड़ा और मकान है ∣ इसके अलावा जल भी हमारी मूल आवश्यकताओं में से एक है ∣ जिसके बिना मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है ∣
आज उस जल का दोहन तो बहुत हो रहा है किन्तु उसको बचाने के प्रयास न के बराबर किए जा रहे हैं ∣
हालांकि सतत विकास के 17 लक्ष्य में से एक लक्ष्य 'पीने योग्य पानी की भी उपलब्धता सभी लोगों तक करना है '∣ जिसके लिए भारत भी लगातार प्रयास कर रहा है ∣
वहीं एक तरफ जहां आज भूगर्भीय जल के स्त्रोत कम होते जा रहे हैं ∣ वहीं दूसरी तरफ प्राकृतिक जल के स्त्रोत भी आज विलुप्त होने की कगार पर है ∣
ऐसे में प्रश्न उठता है कि आज जल को कैसे बचाया जा सकता है ?
इसके लिए सबसे पहले जरूरी है कि नदी से नालें बनाने की प्रक्रिया को रोका जाएं ∣
भूगर्भीय जल क़ो बचाने के लिए टूयबवेल की व्यवस्था को कम से कम किया जाएं ∣
साथ ही पाईप लाईन के आए दिन होने वाले लीकेज को रोकने के लिए अच्छी पाइप लाइन की व्यवस्था की जाएं∣
इसके अलावा आज हम सब को ये समझने की जरूरत है कि जिस तरह घर में एक दिन पानी न आने पर हम पानी का सोच समझकर उपयोग करते हैं∣ जहां इस बात का विशेष ध्यान रखते हैं कि जरा सा भी पानी बेमतलब न बह जाएं इस तरह पानी की बचत हमें जारी रखनी होगी ∣
कहते हैं न, किसी चीज की कीमत उसको खोने के बाद ही समझ में आती हैं ∣ जहां एक ओर वो लोग है जिनके घर में रोज पानी आता है ∣ तो वही दूसरी ओर वो लोग भी है जो अपने घर से न जाने कितने किलोमीटर पैदल चलकर पानी लेकर आते हैं ∣ जिनसे अच्छा पानी का महत्व कोई नहीं जान सकता हैं ∣
आज ' विश्व जल दिवस' के दिन हम सबको एक संकल्प लेने की आवश्यकता है कि हम जरूरत से ज्यादा पानी का उपयोग न करें, पानी की बचत करने के बारे में सोचें, घर के बच्चों को बचपन से इसकी आदत डालें की उन्हें पानी की बचत करना है ताकि उनका कल सुरक्षित रहें∣
आज जल संरक्षण और उसका पुनचक्रण केवल किताबों में सीमित न करके उसे व्यावहारिकता में लाना जरूरी है ∣
"पानी है तो कल है
इसके बिना जीना मुश्किल है" ∣


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