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कोई भी शख्सियत यू ही नहीं बनती

 


अक्सर हीरो की चाह करते करते 

हम भूल जाया करते हैं

उसके बनाने की प्रक्रिया को, 

जब मिलता है मीठा फल खाने को

तो अक्सर हम भूल जाए करते हैं

उस फल को उगाने वाले को, 

किसी खास शख्सियत को देखकर

अक्सर हम इतने मंत्रमुग्ध हो  जाया करते हैं

कि अक्सर हम भूल जाया करते हैं

उसके परिश्रम को , 

उसकी मेहनत को जिसने दिन दिन को  नहीं रात को रात न कहा

मेहनत की फिर चाहे उस पर कितने भी 

पत्थर पड़े, लोगों के तानों ने उसके जख्म को हरे किए 

फिर भी वो चलता रहा

और सिखाया लोगों को 

कि अक्सर ऊंचा उठने के लिए

बहुत कुछ सहना 

होता है

किसी खास शख्सियत का जन्म क्या ऐसे ही होता है? 

Comments

Poornima said…
Great words 👏👏👏

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Today Thought

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