पैसे की बचत


एक तरफ उपभोक्तावाद लगातार बढ़ता जा रहा है ∣ जहां पर हम अधिक चीजों को खरीद कर अपने पास रखने की चाहत में लगातार धन का व्यय कर रहे हैं ∣ दूसरी तरफ कभी गुल्लक में पैसे संचय करने वाला हमारा विचार लगातार जंग खा रहा है ∣ 
जहां पर हमें ये ही समझ में नहीं आ रहा है एक हद तक ही उपभोक्तावादी होना सही है ∣ इसकी अति होना न केवल हमारे लिए अपितु उन लोगों के लिए भी नुकसान देह है जो ज्यादा धन का अर्जन नहीं करते हैं किन्तु हमारी तरह वो भी अपना  गुजर बसर  ठीक से करना चाहते हैं जिनके बारे में हम सोचना ही भूल गए हैं ∣
अर्थव्यवस्था की दृष्टि से किसी चीज के मंहगे होने के दो कारण होते हैं ∣ एक जब लोगों के हाथ में बहुत पैसा आ जाता है और वो अधिक खर्च करने लगते हैं जिससे बाजार में चीजों के भाव बढ़ जाते हैं ∣ दूसरा तब जब किसी एक वस्तु को खरीदने वालों की संख्या  एक से अधिक हो जाती है जहां पर मांग ज्यादा हो जाती है  उत्पादन घट जाता है ∣

आज समकालीन समय में जहां पर कोरोना वायरस के चलते अनेक हमारे जीवन में अनेक  अनिश्चितता आ गयी है वहीं ऐसे में आज हम सबको थोड़ा पैसे की बचत के बारे में भी सोचना चाहिए ∣
जिससे हम अपने भविष्य को सुरक्षित रख सकें ∣

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