जिंदगी का सफरचलते चलते थम नजाए कहीं,इस से पहले तु सच कर अपनेसपने सभीकौन जाने कल क्या हो जाएंतेरे जीवन में कभी,पल पल का हिसाब रखने वालेएक पल रूक भी तु सही,कहीं अपनी मस्ती के बीचकिसी अपने को भूल गया तु क्या कहीं,जिंदगी बड़ी अनिश्चित है जहां आज के मिले कल नहीं मिलतेतु भूल गया है क्याअपने को कही,एक जगह तेरे बड़े दोस्त यर हैतो कही अपनी खुशियों में खुश होना भूल गया है क्या कही,जिंदगी क सफर चलते चलतेएक घड़ी कहीं रूक त़ोक्या कुछ अपना भूल गया तु कही.
कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है। आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो।
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