वही रास्ते कब अजनबी हो गए
न जाने कब हम खो गए,
जिस रास्ते का करते थे हम हर रोज दीदार
अब वही रास्ते जैसे अनजाने से हो गए,
एक वक्त था जब हमें न थी फिक्र औरों की
पर अब तो जैसे हम इस दुनिया के ही हो गए
हमारे चाहने न चाहने पर,
चाहत जिसकी की वो लोग हम से दूर हो गए.
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