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राजनीति की सही परिभाषा बताती है सरकार मूवी

 सरकार मूवी रिव्यू



सरकार मूवी मुख्य रूप से राजनीति के उस सच को दिखाती है ∣ जिसे अक्सर हम सामने रहकर भी नहीं देख पाते हैं ∣ जिसमें सरकार कोई चलता है और उसका दावेदार कोई और होता है ∣

इस मूवी की कहानी काल्पनिक  रूप से मुम्बई शहर के सबसे बड़े गुंडे के जीवन पर आधारित है ∣ जिसका नाम सुभाष

 सरकार नागरे ( अभिताभ बच्चन) है ∣

जो लोगों को न्याय दिलाने का काम करता है ∣ जिस पर जनता को बहुत ज्यादा भरोसा है इसके विपरीत सरकार का बड़ा बेटा विष्णू नागरे  ( के के मेनन) अपनी ताकत का गलत उपयोग करता है ∣ और अपने पिता के आदर्श पर न तो चलता है ∣ न ही उस पर विश्वास करता है ∣

मूवी जैसे जैसे बढ़ती है हम देखते हैं,कि  सुभाष सरकार नागरे से ईर्ष्या करने वाले लोग उनके खिलाफ एक साजिश रचते है जिसमें उनका अपना बड़ा बेटा विष्णू नागरे  भी शामिल होता है इसी बीच सरकार का छोटा बेटा शंकर जो अभी कुछ दिन पहले ही विदेश से पढ़कर आया है वो इस लड़ाई में कूद पड़ता है अपने पिता के बचाव में 

   के लिए लड़ाई लड़ता है   जिसे राजनीति ज्यादा कुछ खास पसंद नहीं किन्तु वो अपने पिता सुभाष सरकार नागरे ( अभिताभ बच्चन) का बहुत सम्मान करता है ∣ किन्तु उसकी गर्लफ्रेंड  पूजा ( कैटरीना कैफ़  ) को अपने पिता से ये मालूम चलता है कि उसका पिता सुभाष सरकार मुम्बई का सबसे बड़ा गुंडा है ∣ इस बात को  पूजा शंकर से बताती है जिस पर शंकर कहता है कि मेरे पिता एक अच्छे इंसान है ∣ जो लोगों की भलाई के लिए काम करते हैं ∣ और वो उसके पिता को जेल जाते देख शंकर को अपने साथ विदेश चलने को कहती है जिसे वो मना कर देता है और यहां से पात्र पूजा का रोल खत्म हो  जाता है और शंकर का साथ उसके घर में रह रही अवंतिका  (तनिशा मुखर्जी) देती है जो उससे बचपन से प्यार करती है ∣

वहीं फिल्म आगे बढ़ती है और हम देखते विष्णू अपनी फिल्म में काम कर रहे फिल्म के हीरो को गोली मार देता है ∣ जिससे उसकी मौत हो जाती है ∣ सरकार अपने बेटे की इस गलती के लिए उसके बहुत डांटते है∣ और उसे घर से निकाल देते हैं ∣ 

वही दूसरी तरफ मोतीलाल  खुराना ( अनुपम खेर)की मौत के हत्या करने के जुर्म में सुभाष सरकार नागरे को जेल जाना पड़ता है ∣ जिसमें विष्णू, रशीद ( जाकिर हुसैन) और सरकार के कुछ दुश्मनों का हाथ होता है जो एक साजिश होती है सरकार के खिलाफ ∣  

इन सब घटनाओं के चलते शंकर अपने पिता को निर्दोष साबित करने के लिए कुछ लोगों की मदद मांगता है जहां उसे मालूम चलता है कि यहां सब लोग रशीद, विष्णू से मिले हुए हैं शंकर अपनी जान बचकर कैसे न कैसे भाग निकलता है रास्ते में उसे जानकारी मिलती है कि उसके पिता पर जेल में हमला होने वाला जब तक वो वहां पर जाता है ∣ उन पर गोली लग चुकी होती है ∣ उन्होंने अस्पताल ले जाया जाता है जहां वो  कुछ दिन रहने बाद ठीक हो जाते हैं वहीं मोतीलाल  खुराना (अनुपम खेर)के असली कातिलों का पता लगने के कारण उन्हें जेल से छोड़ दिया जाता है ∣ 

लेकिन सरकार का अपना बेटा अपने पिता की हत्या करने इरादे से घर आता है और वो जैसे ही उन्हें गोली मारने को करता जाता है  शंकर वहां आकर उन्हें बचा लेता है ∣ और अपने भाई को बहुत मारता है और उसकी हत्या कर देता है ∣ 

फिर शुरू होती है दुश्मनों पर कार्यवाही वो एक एक कर रशीद (जाकिर हुसैन) समेत सभी लोग को मार देता है ∣ और मुख्यमंत्री ज़ो इस साजिश मुख्य खिलाड़ी है ∣ उस पर ईडी से भष्ट्राचार समेत सभी धाराओं पर केस करवाकर जेल भिजवा देता है ∣ राष्ट्रपति उससे इस्तीफे की मांग कर लेते हैं ∣

और फिल्म खत्म हो जाती है ∣

इसकी पटकथा बहुत अच्छी लिखी गयी है जहां कहीं पर भी ऐसा नहीं लगता है कि इसमें अतिश्योक्ति की गयी है ∣ कैमरे का उपयोग बहुत सही ढंग से कहानी कहने के लिए किया गया है ∣ सभी पात्रों ने अपनी भूमिका बहुत अच्छी निभाई है ∣


*निर्देशक

राम गोपाल वर्मा

*निर्माता

राम गोपाल वर्मा

पराग संघवी

*लेखक

मनीष गुप्ता

*अभिनेता

अभिषेक बच्चन

अमिताभ बच्चन

कैटरीना कैफ़

के के मेनन

तनीशा

अनुपम खेर

सुप्रिया पाठक

*संगीतकार

अमर मोहिले


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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..