कितनी भी परिभाषा गढ़ ले
तेरी कामयाबी पर
पर तेरे अस्तित्व के लिए
तु कितना संघर्ष करती है
घर और बाहर की जिम्मेदारी निभाते हुए
तु अक्सर खुद ही गुमनाम हो जाया करती है∣
बहुत होती बातें तेरे चलने ,बैठने पर
पर तुझें क्या आराम करने की भी फुर्सत मिलती है
फिर भी अपनी ख्वाहिश को पूरा की करने चाह
तो तु अपने अंदर ही दफन
कर लेती है ∣
दूसरों को खुश करने की कोशिश
में खुद को खुश करने का हौसला तु
नहीं जुटा पाती है
सबकी फरमाइश पूरी करते करते अपने आप को ही
भूल जाया करती है
अक्सर जब बात तेरी खुशियों कि आती है
तो तु गुमनाम कही पर हो जाया करती है ∣
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