"दूर के ढोल सुहावने लगते हैं" ये कहावत अक्सर हम सुनते हैं किन्तु इसका भावार्थ अक्सर हम तब समझते हैं ∣ जब हमारे आस पास ही इसका उदाहरण मौजूद हो तब हमें मालूम चलता है जो चीज दूर से दिखाई दे वो जरूरी नहीं नजदीक से उतनी खूबसूरत हो.
अक्सर हम किसी पसंदीदा व्यक्ति के जीवन शैली उसकी समाज में प्रतिष्ठा देख मंत्रमुग्ध हो जाते है ∣
हमें लगता है कि उसकी जिंदगी कितनी अच्छी है उसके जीवन में तो कोई परेशानी ही नहीं है काश में उसकी जगह पर होता
किन्तु ऐसा सोचता वक्त हम अक्सर उस व्यक्ति के संघर्ष को भूल जाते हैं जो उसने यहां तक पहुंचने में लगाया, वो त्याग भूल जाते हैं जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकी ∣
इस दुनिया में हर व्यक्ति की जिंदगी में परेशानी होती है चुनौती होती है जिसका मुकाबला कर लेना वाला व्यक्ति हीरो और इसमें हार जाने वाला व्यक्ति जीरो होता है∣
कोई सफल व्यक्ति से ये नहीं पूछता की तुमने यहां तक आने में क्या कुछ झेल, कितने दर्द को सहा लोग तो केवल उसकी सफलता और प्राण प्रतिष्ठा देखते हैं ∣
ये दुनिया यही है जहां पर आपके हार जाने पर हर कोई आपको भला बुरा बोलता है किन्तु साथ देने वाले कम ही होते हैं अक्सर हीरे खरीदने वाले उसे तराशने वाले के हाथ कहा देखते हैं, एक अलिशान घर को देखते तो सब है पर उससे बनाने वाले का शरीर को कहां देखते हैं किसी भी चीज़ का सृजन क्या आसान होता है?
जहां पर वो अपनी आधी जिंदगी सृजन करने में लगा देते हैं∣
वर्तमान समय में हम सब ही लोग कोई न क़ोई परेशानी का सामना कर रहे हैं और परिस्तिथियों से लड़कर आगे बढ़ रहे हैं क्यों न जब हम इतनी लड़ाई लड़ ही रहे हैं तो एक लड़ाई खुद को बेहतर बनाने के लिए लड़े इस हम जीते या हारे
किन्तु हमें इस बात का अफसोस तो नहीं रहेगा की हमने लड़ाई नहीं की हमें खुद पर गर्व रहेगा कि हमने इस प्राप्त करने का प्रयत्न किया .
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