हम में से क ई लोग ऐसे होते हैं। जो भले परीक्षा के पहले कुछ तैयारी न करे किन्तु परीक्षा आते ही सबकुछ बेहतर करने की सोचते हैं।
किन्तु ऐसे में क ई बार कुछ लोग उनकी परीक्षा में वो बेवजह के काम सौपते है ये कहकर की तु पढ़ता ही क्या है, चल मेरे साथ और सामने वाला अपनी अगंभीरता के कारण अपने काम को सिर्फ निपटाने जैसा करता है। पर उसके दिल में भी इच्छा होती है जिंदगी की रेस में आगे निकलने की पर अफ़सोस उसे अपनी अगंभीरता का मूल्य एक अरसे के बाद ज्यादा चुकाना पड़ता है ।
आज समकालीन समय में हम सब को अपनी उन चीज़ों के लिए गम्भीर होने की जरूरत है जो न सिर्फ हमारी आज बल्कि कल की भी जरूरत है जिसमें हमें अपना सर्वश्रेष्ठ देने की बहुत आवश्यकता है नहीं तो हम न केवल अपने काम से बल्कि अपने विचारों से भी अगम्भीर बन जाएंगे ।
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