जिंदगी को जीओं एक उत्सव की तरह





किसी भी त्यौहार के आते ही  चारों तरफ चहल पहल दिखाई देने लगती है ∣ लोग एक बार फिर अपने रिश्ते को मजबूत करते हुए दिखाई देने लगते हैं  ∣ 

 

 ये त्यौहार ही तो होते हैं जो हमें जोड़ते हैं अपने से, हमारे अपनों से, जहाँ पर एक बार फिर हम रिश्ते की अहमियत समझते हैं ∣


हमारी जिंदगी भी एक उत्सव सी होती है ∣ वहाँ पर हम 

सुख और दुख दोनों चीजों का स्वाद लेते हैं जहाँ पर हम

थोड़े ही समय में अपनों से  घुल मिल जाते हैं 

जहाँ पहले शिक्षक होते हैं हमारे  माँ, बाप जो हमें बेस्वार्थ  स्नेह देते  हैं जिनके स्नेह की छाव में हम बढ़ते हैं ∣  शुक्ल पक्ष की भांति जहाँ हम संस्कार और जीने की कला को सीखते हैं∣ 

क्यों न हम अपनी जिंदगी को एक उत्सव की तरह देखें जहाँ पर हम हर छोटी - छोटी खुशी पर खुश होवे जिंदगी में ढेरों परेशानी के बीच सकरात्मकता का साथ न छोड़े , चलों जिंदगी को एक उत्सव सा मनाने की तैयारी में लग जाए ∣

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