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अहमियत समझने की जरूरत है हमें आज पर्यावरण की

 


पर्यावरण की परिभाषा भले ही हम बचपन से पढ़ते आए हैं कि " हमारे चारों ओर के घेरे हुए आवरण को हम पर्यावरण कहते है ∣ जिसमें जो चीजे हम प्रकृति के द्वारा प्राप्त होती है जिनका एक बार उपयोग करके उन्हें नहीं पाया जा सकता है 

उन्हें अनवीकरणीय स्त्रोत कहा जाता है∣ जिसमें पेट्रोल, डीजल, कोयला है ∣ जिनका दोहन आज के समय में बहुतायत से किया जा रहा है ∣

तो वही दूसरी ओर आज विश्व में खाद्यान्न ओर पीने के  पानी की कमी बहुत से देशों में देखी जा रही है जिसके कारण बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं तो वही दूसरी ओर पीने के पानी की कमी के चलते एक तिहाई आबादी एक जगह से दूसरी जगह पलायन करने को मजबूर हो रही है ∣ 

जिसके निदान के  लिए जरूरी है कि अब हम ठोस कदम उठाएं , जिसमें सबसे महत्वपूर्ण  है कि हम वास्तविकता से मुंह न मोड़कर उसकी असलियत को जानकर उसके निदान के बारें में सोचे 


अपनी आज की   पीढ़ी को  पर्यावरण के मायने को समझाएं  जो केवल किताब तक सीमित न होकर हम उनके जीवन की व्यावहारिकता में भी शामिल करें जिसकी शुरुआत हमें आज से   अभी से करना होगा  ∣

##save environment ## save future

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..