वो सुबह




कभी कभी हमारी सुबह कुछ अलग अदाज में होती है जहाँ हमारी आंख पूरी तरह खुलने से पहले हीपरेशानी हमारे सामने  खड़ी होती है ∣जैसे दे रही है हमें चुनौती और हमारा हाल हम से पूछती है∣ 

जिंदगी में सबसे दुखद क्षण कौन सा होता है  कुछ एक पल के लिए हमारा उसे आमना सामना होता है ∣ 

उस पल तो जमीन आसमां सब हमारे लिए एक सा हो जाता है और सिर्फ ये मन रोता है कि ये कौन सी परीक्षा की घड़ी हमारी जहाँ पर एक के बाद एक परीक्षा हमारा ये खुदा लेता है  ∣ 


कुछ देर तक तो समझ ही नहीं आता है  हमें कि हम आगे क्या करेगें जैसे हमारा मन हम ही हम से कह रहा होता है ये कैसे हो सकता है ? 


तब केवल मन रोता है आंखों से आसूं ऐसे बहते हैं जैसे की अब सब्र का बांध टूटा  है

 किन्तु क्या रोने का भी हक होता है जब आपके सिर्फ पर क ई उत्तरदायित्व और जिम्मेदारी सिर पर खड़ी हो जैसे जिंदगी का सफर फिर से  शुरू होता है ∣ 


जिंदगी में असली प्रेरणा का स्त्रोत हमारा मन है जो हम से कहता है सबकुछ अच्छा होगा और हमारे सामने एक नया छिपा हुआ रहस्य खुलता है बाहर वाले केवल देखते तमाशा है कुछ ही लोग होते हैं जिन्हें फिक्र होती है हमारी वरना  बाकी सब तो हमारे शेक देखते हैं  और हाल  चाल  पूछते हैं ∣

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