जब कर्तव्यों की बात आ जाएं तब

( मैलिक कर्तव्य) 

अपने अधिकारों की बात तो सब लोग करते हैं ∣ किन्तु अपने कर्तव्यों की बात तो जैसे भूल ही जाया करते हैं ∣ 

 

अपने अधिकारों की बात तो सब लोग  करते हैं ∣ किन्तु अपने कर्तव्यों की बात तो जैसे भूल ही जाया करते हैं ∣ 


अगर हम अपने कर्तव्यों की बात करें तो वो भारत के संविधान के द्वारा हमें संविधान के भाग 4 में दिया गया है ∣ जो कि आयरलैंड से लिया गया है ∣ जिसको  भारत में लाने का श्रेय एन वी राम को दिया जाता है ∣


जिन्होंने व्यक्ति के कर्तव्यों को लेकर जोर दिया जिसका परिणाम या हुआ की  1976 में भारत के संविधान के 42 वें संशोधन को करके राज्य के नीति निदेशक तत्व को लाया गया जिसका मुख्य उद्देश्य सामजिक, आर्थिक समानता, स्वतंत्रता भारत के नागरिकों को देना था जिसमें कुछ सिद्धांत की बात भी कही गयी है जिनमें, समाजवादी सिद्धांत, उदारवादी सिद्धांत, गांधीवादी सिद्धांत है ∣ 


अब आप कहेगें में आपको ये सब क्यों बता रही हूँ तो मैं आपका ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहूंगी कि अगर हम अपने 11 कर्तव्य की ओर ध्यान दे तो हम जानेगें  कि हम अपने कर्तव्यों को भले किताबों में पढ़ते हैं ∣ जिसमें हम पर्यावरण संरक्षण, संविधान की रक्षा, सार्वजनिक सपत्ति की रक्षा शामिल हैं जिसमें पर्यावरण का संरक्षण तो केवल सिर्फ किताबी ज्ञान हो गया है हमारी बढ़ती हुई उपभोक्ता वाद सोच  पर्यावरण को हर तरह से नुकसान पहुंचा रही है ∣ जिस पर हमारा ध्यान नहीं जा रहा है ∣

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