जिंदगी की यही रीत

 


जिंदगी लगातार एक जैसी जीना और अचानक उसमें कोई बदलाव आ जाना  जैसे हमारे लिए एक झटका सा होता है ∣

जहाँ पर हमारे सामने ऐसी विकट परिस्थितियां आकर खड़ी हो जाती है ∣ जो हमको अंदर से हिलाकर रख देती है ∣

     वहां पर एक समय तक तो हमें समझ ही नहीं आता है   कि  हम क्या करें? क्या न करें? 



ऐसे समय में हमारे पास, केवल दो ही विकल्प होतें है ∣ यहां तो हम परिस्थितियों के सामने घुटने टेक दे, यहां फिर हम उसे मुकाबला करें ∣ 

जहाँ चोट अपनों को लगती है तो नेत्र  से आसूं,  हमारे बहते हैं ∣ शायद जिंदगी की यहीं रीत हैं यहाँ थोड़े आसूं है, थोड़े गम है ∣

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