चूकंदर हम में से ज्यादा तर लोगों को बिल्कुल भी रास नहीं आता है और जब हमें उसे खाना होता है ∣ तो हमारी ज्यादा से ज्यादा कोशिश ये होती है कि हम उसको कम से कम खाएं जबकि इसके विपरीत अगर हमें हमारी मनपसंद कोई चीज मिल रही हो जैसे की इमरती तो हम उसे तब तक खाते है जब तक की हमारा मन उसे खाकर उब न जाएं ∣
अब आप कहेगें मैं सब को ये क्यू बता रही ही हूँ?
तो मैं आप सब का ध्यान एक आकड़े पर करना चाहूंगी जिसमें ये बताया गया है कि बदलती हुई जीवनशैली के चलते
लड़कियों में भारी मात्रा हीमोग्लोबिन की कमी पायी जा रही है∣
कुछ को तो इस कारण एनमिनिया भी है ∣ जिसका एक कारण उनके खान पान को लेकर विशेष तरह का रूझान हैै...जहाँ पर वो आलू, भिंडी जैसी सब्जियों का ही ज्यादा सेवन करती है और दाल, गिलकी, कद्दू, परवर जैसी सब्जियां तो उनके लिए करेला की सब्जी जैसे हो जाता है जिसका सेवन भी वो कत ई नहीं करती है ∣
जिसके परिणामस्वरूप कुछ लड़कियों को भरी दिक्कत का सामना करना पड़ता है∣ जिसके कारण उनके दो माह माहवारी नहीं आती है और जब वो स्त्री विशेषज्ञ के पास जाती है∣ तो वहाँ पर क ई हीमोग्लोबिन को बढ़ाने की टोनिक देती है जिसका स्वाद हेमपुष्पा की टाॅनिक से भी खराब होता है जो न पी जाती है न ही उगली जाती है ∣
मेरा आज इस लेख के माध्यम से आप सभी लड़कियों को यही कहना है कि
अगर आप हर माह होने वाली परेशानी को थोड़ा कम करना चाहती है∣
तो ज्यादा से ज्यादा उन चीजों का सेवन करें जो आपका हीमोग्लोबिन बढ़ाती हो साथ ही आपको निरोग करती हो इसके बाद भी अगर आप हीमोग्लोबिन बढ़ने के लिए आयु वैदिक कड़वी दवा का सेवन करना चाहती है तो ये आपकी मर्जी मेरा मकसद तो केवल आपको जागरूक करना था ∣
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