त्यौहार का नाम आते ही हम सब को न ए - न ए तोहफे, भिन्न तरह के पकवान सब घरों में चहल पहल दिखाई देने लगती है ∣
जहाँ पर अभी अभी व्याही बेटी अपने पीहर आयी होती है जहाँ उसे अपनी दादी माँ से मिलती सीख घर को चलाने की, तो माँ से मिलते नुस्खे घर को सहजने की बात चाहे तीज की हो या छठ की हर त्यौहार में छा जाती घर में खुशी की जैसे बसंत की मधुर बेला सी ,
सुहागने रचाती मेंहदी पिया के नाम अपने और घर परिवार फिर होते संग संग हम साथ साथ जैसे एक डाली के फूल है सब घर के सदस्य जैसे ये परंपरा और रीति रिवाज ही तो है जो हम सब को आज भी जोड़े हुए है ∣
जहाँ पर हम सीखते न ए सदाचार के गुण और बड़ो से किसी चीज के नेतृत्व और संयम के मूलभूत गुण
समकालीन समय में जब हम सब हर चीज पाश्चात्य सभ्यता के जैसे करने की सोच रहे हैं हमें काफी हद तक अपने तीज त्यौहार से लगावा थोड़ कम सा हो गया है ∣ तब ऐसे में ये तीज त्यौहार ही तो है जो हमें अपने परिवार और अपनों से जोड़े हुए हैं ∣ जो हमें लाते है नजदीक त्यौहार के कारण वरना आज भी बेटी, बहन के हल्दी के हाथ की छाप तो अदृश्य से हो ग ए है ∣
आज नहीं फिर बेटी बोले आधुनिकता की है बात
चारों तरफ कोयल बोले
आया तीज त्यौहार
अपने संग लाया मधुर सौगात
घर में पिसती मेंहदी बताती
आज कुछ तो है अलग बात
घर बनते गुजे, पापड़ की खुश बू घर में आए आज ∣

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