जिंदगी शायद यही है

 


जिंदगी शायद यही है जहां पर हमें अपनों संग पास बैठने का वक्त बहुत कम मिलता है  ∣ कभी दिखाई देते बादल तो कभी बेवजह ही बारिश का पल हमारे जिंदगी के करीब है ∣

 जहाँ हर किसी को है, उससे कुछ न कुछ शिकायतें परेशान इस राह पर हर मुसाफिर हैं ∣ 

  



 तो वही कुछ लोग तो परफेक्शनिस्ट बनने के चक्कर मैं अक्सर एक ही प्याले को सजाते जिंदगी बिता देते हैं ∣ जबकि आधी दुनिया प्याले की सजावट के बाहर है जहाँ परफेक्शनिस्ट नहीं परफेक्ट बनने की कोशिश में लगे लोगों की जरूरत है ∣ 


"जिंदगी यही है

जहाँ पर सीखने की प्रक्रिया निरंतर रखनी पड़ती, 

समय की पाबंदी के बीच

खुद को बेहतर बनाने की कोशिश हर दिन करनी पड़ती

हर वक़्त इम्तिहान की घड़ी हमारा

इंतज़ार कर रही होती 

न ए न- ए अहसासो के साथ चली जिंदगी

जहाँ किसी के आने की आहट 

तो किसी के पीछे छुट जानें की चिंता हमें रहती

पर जिंदगी रूकती नहीं चलती जाती

जहाँ पर एक नया आलोक

कर रहा हमारा इंतजार

क्योंकि जिंदगी शायद यहीं हैं

जहाँ हर दिन एक नयी खोज में निकलते हम

हर दिन खुद को बेहतर बनाने की चाह में करते कोशिश

फिर चाहें ये जिंदगी में 

रूकावट की आवृत्ति का सफर

कितना चलता रहे 

हमें न होती फिक्रर ∣ "

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